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Sunday, February 26, 2017

February 26, 2017

Best of Anjum Rahbar | Top 20 Collection of अंजुम रहबर


  • दिल की किस्मत बदल न पाएगा
    बन्धनों से निकल न पाएगा
    तुझको दुनिया के साथ चलना है
    तू मेरे साथ चल न पाएगा.
  • दोस्ती क्या है ये दुनिया को भी अंदाजा लगे
    खत उसे लिखना तो दुश्मन के पते पर लिखना.
  • साथ छूटे थे, साथ छूटे हैं
    ख्वाब टूटे थे, ख्वाब टूटे हैं
    मैं कहाँ जाकर सच तलाश करूं
    आजकल आईने भी झूठे हैं.
  • ये तमन्ना है अंजुम, चलेंगे कभी
    आपके साथ हम, आपके शहर में.
  • इतने करीब आके सदा (आवाज) दे गया मुझे
    मैं बुझ रही थी, कोई हवा दे गया मुझे.
  • जंगल दिखाई देगा अगर हम यहाँ न हों
    सच पूछिए, तो शहर की हलचल हैं लड़कियाँ.
  • उसने कहो कि गंगा के जैसी पवित्र हैं
    जिनके लिए शराब की बोतल हैं लड़कियाँ.
  • अंजुम तुम अपने शहर के लड़कों से ये कहो
    पैरों की बेड़ियाँ नहीं पायल हैं लड़कियाँ.
  • रंग इस मौसम में भरना चाहिए
    सोचती हूँ प्यार करना चाहिए.
  • प्यार का इकरार दिल में हो मगर
    कोई पूछे तो मुकरना चाहिए.
  • दिल किसी की चाहत में बेकरार मत करना
    प्यार में जो धोखा दे, उससे प्यार मत करना
    कारोबार में दिल के तजुर्बा जरूरी है
    जिंदगी का ये सौदा तुम उधार मत करना
    तू मुझे मना लेना, मैं तुझे मना लूंगी
    प्यार की लड़ाई में जीत-हार मत करना.
  • घर के लोगों को हर बात का तेरी मेरी मुलाकात का
    पायलों से पता चल गया, चूड़ियों से खबर हो गई
    मुझको खिड़की पे बैठे हुए, आज भी रात भर हो गई.
  • आज मशहूर फिर शहर में प्यार की एक कहानी हुई
    एक लड़का दीवाना हुआ, एक लड़की दीवानी हुई.
  • मेरी आँखों की गहराई में, सबने चेहरा तेरा पढ़ लिया
    आज मैं आईना देखकर पानी-पानी हुई.
  • वक्त बर्बाद करती रहती हूँ
    रोज फरियाद करती रहती हूँ
    हिचकियाँ तुझको आ रही होंगी
    मैं तुझे याद करती रहती हूँ.
  • जन्नतों को जहाँ नीलाम किया जाएगा
    सिर्फ औरत को हीं बदनाम किया जाएगा
    हम उसे प्यार इबादत की तरह करते हैं
    अब ये ऐलान, सरेआम किया जाएगा.
  • नाम मेरा लेकर छेड़ते हैं उसको
    क्यों मेरा दीवाना सबको खटकता है
    मैं हीं नहीं पागल उसकी जुदाई में
    सुनती हूँ रातों को, वो भी भटकता है
    प्यार की खुशबू में दोनों नहाए हैं
    मैं भी महकती हूँ वो भी महकता है.
  • है अगर प्यार तो, मत छुपाया करो
    हमसे मिलने खुलेआम आया करो
    दिल हमारा नहीं, है ये घर आपका
    रोज आया करो, रोज जाया करो
    प्यार करना न करना अलग बात है
    कम-से-कम वक्त पर घर तो आया करो.
  • तेरी यादों को प्यार करती हूँ
    सौ जन्म भी निसार करती हूँ
    तुझको फुर्सत मिले तो आया जाना
    मैं तेरा इंतजार करती हूँ.
  • रोशनी का जवाब होती है
    खुशबुओं की किताब होती है
    तोड़ लेते हैं हवस वाले, लड़कियाँ तो गुलाब होती है.
  • मजबूरियों के नाम पर सब छोड़ना पड़ा
    दिल तोड़ना कठिन था मगर तोड़ना पड़ा
    मेरी पसंद और थी सबकी पसंद और
    इतनी जरा सी बात पर घर छोड़ना पड़ा.
  • तमाम उम्र खुदा से यही दुआ मांगी
    खुदा करे कि तुझे मेरी बददुआ न लगे.
  • ये किसी नाम का नहीं होता
    ये किसी धाम का नहीं होता
    प्यार में जबतलक नहीं टूटे,
    दिल किसी काम का नहीं होता.

Thursday, February 23, 2017

February 23, 2017

हो काल गति से परे चिरंतन ~ कुमार विश्वास


हो काल गति से परे चिरंतन / कुमार विश्वास

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Photo Credit : Google Images
हो काल गति से परे चिरंतन,
अभी यहाँ थे अभी यही हो।
कभी धरा पर कभी गगन में,
कभी कहाँ थे कभी कहीं हो।

तुम्हारी राधा को भान है तुम,
सकल चराचर में हो समाये।
बस एक मेरा है भाग्य मोहन,
कि जिसमें होकर भी तुम नहीं हो।

न द्वारका में मिलें बिराजे,
बिरज की गलियों में भी नहीं हो।
न योगियों के हो ध्यान में तुम,
अहम जड़े ज्ञान में नहीं हो।

तुम्हें ये जग ढूँढता है मोहन,
मगर इसे ये खबर नहीं है।
बस एक मेरा है भाग्य मोहन,
अगर कहीं हो तो तुम यही हो।

Monday, February 20, 2017

February 20, 2017

जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है ~ राहत इन्दौरी

जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है ~ राहत इन्दौरी

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Photo Credit : Google Images

जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है
वो शख्स, सिर्फ भला ही नहीं, बुरा भी है

मैं पूजता हूँ जिसे, उससे बेनियाज़ भी हूँ
मेरी नज़र में वो पत्थर भी है खुदा भी है

सवाल नींद का होता तो कोई बात ना थी
हमारे सामने ख्वाबों का मसअला भी है

जवाब दे ना सका, और बन गया दुश्मन
सवाल था, के तेरे घर में आईना भी है

ज़रूर वो मेरे बारे में राय दे लेकिन
ये पूछ लेना कभी मुझसे वो मिला भी है

Friday, February 17, 2017

February 17, 2017

ये हादसा तो किसी दिन गुज़रने वाला था ~ राहत इन्दौरी

ये हादसा तो किसी दिन गुज़रने वाला था ~ राहत इन्दौरी

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ये हादसा तो किसी दिन गुज़रने वाला था
मैं बच भी जाता तो इक रोज़ मरने वाला था

तेरे सलूक तेरी आगही की उम्र दराज़
मेरे अज़ीज़ मेरा ज़ख़्म भरने वाला था

बुलंदियों का नशा टूट कर बिखरने लगा
मेरा जहाज़ ज़मीन पर उतरने वाला था

मेरा नसीब मेरे हाथ काट गए वर्ना
मैं तेरी माँग में सिंदूर भरने वाला था

मेरे चिराग मेरी शब मेरी मुंडेरें हैं
मैं कब शरीर हवाओं से डरने वाला था

Wednesday, February 15, 2017

February 15, 2017

वफ़ा को आज़माना चाहिए था | राहत इन्दौरी


वफ़ा को आज़माना चाहिए था ~ राहत इन्दौरी

वफ़ा को आज़माना चाहिए था, हमारा दिल दुखाना चाहिए था
आना न आना मेरी मर्ज़ी है, तुमको तो बुलाना चाहिए था

हमारी ख्वाहिश एक घर की थी, उसे सारा ज़माना चाहिए था
मेरी आँखें कहाँ नाम हुई थीं, समुन्दर को बहाना चाहिए था

जहाँ पर पंहुचना मैं चाहता हूँ, वहां पे पंहुच जाना चाहिए था
हमारा ज़ख्म पुराना बहुत है, चरागर भी पुराना चाहिए था

मुझसे पहले वो किसी और की थी, मगर कुछ शायराना चाहिए था
चलो माना ये छोटी बात है, पर तुम्हें सब कुछ बताना चाहिए था

तेरा भी शहर में कोई नहीं था, मुझे भी एक ठिकाना चाहिए था
कि किस को किस तरह से भूलते हैं, तुम्हें मुझको सिखाना चाहिए था

ऐसा लगता है लहू में हमको, कलम को भी डुबाना चाहिए था
अब मेरे साथ रह के तंज़ ना कर, तुझे जाना था जाना चाहिए था

क्या बस मैंने ही की है बेवफाई,जो भी सच है बताना चाहिए था
मेरी बर्बादी पे वो चाहता है, मुझे भी मुस्कुराना चाहिए था

बस एक तू ही मेरे साथ में है, तुझे भी रूठ जाना चाहिए था
हमारे पास जो ये फन है मियां, हमें इस से कमाना चाहिए था

अब ये ताज किस काम का है, हमें सर को बचाना चाहिए था
उसी को याद रखा उम्र भर कि, जिसको भूल जाना चाहिए था

मुझसे बात भी करनी थी, उसको गले से भी लगाना चाहिए था
उसने प्यार से बुलाया था, हमें मर के भी आना चाहिए था

Monday, February 13, 2017

February 13, 2017

मुहब्बतों के दिनों की यही ख़राबी है | वसीम बरेलवी

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Photo : Google


तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते

इसीलिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आते



मुहब्बतों के दिनों की यही ख़राबी है
ये रूठ जाएँ तो फिर लौटकर नहीं आते



जिन्हें सलीका है तहज़ीब-ए-ग़म समझने का
उन्हीं के रोने में आँसू नज़र नहीं आते



ख़ुशी की आँख में आँसू की भी जगह रखना
बुरे ज़माने कभी पूछकर नहीं आते



बिसाते -इश्क पे बढ़ना किसे नहीं आता
यह और बात कि बचने के घर नहीं आते



'वसीम' जहन बनाते हैं तो वही अख़बार
जो ले के एक भी अच्छी ख़बर नहीं आते

Sunday, February 12, 2017

February 12, 2017

क़सम तोड़ दें.........| डा० विष्णु सक्सेना

क़सम तोड़ दें.........

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चाँदनी रात में-
रँग ले हाथ में-
ज़िन्दगी को नया मोड़ दें,
तुम हमारी क़सम तोड़ दो हम तुम्हारी क़सम तोड़ दें ।

प्यार की होड़ में दौड़ कर देखिये,
झूठे बन्धन सभी तोड़ कर देखिये,
श्याम रंग में जो मीरा ने चूनर रंगी
वो ही चूनर ज़रा ओढ़ कर देखिये,
तुम अगर साथ दो-
हाथ में हाथ दो-
सारी दुनियाँ को हम छोड़ दें...
तुम हमारी क़सम तोड़ दो हम तुम्हारी क़सम तोड़ दें ।

देखिए मस्त कितनी बसंती छटा,
रँग से रँग मिलकर के बनती घटा,
सिर्फ दो अंक का प्रश्न हल को मिला
जोड़ करना था तुमने दिया है घटा,
एक हैं अंक हम-
एक हो अंक तुम-
आओ दोनों को अब जोड़ दें.....
तुम हमारी क़सम तोड़ दो हम तुम्हारी क़सम तोड़ दें ।

स्वप्न आँसू बहाकर न गीला करो,
प्रेम का पाश इतना न ढीला करो,
यूँ ही बढ़ती रहें अपनी नादानियाँ
हमको छूकर के इतना नशीला करो,
हम को जितना दिखा-
सिर्फ तुमको लिखा-
अब ये पन्ना यहीं मोड़ दें.....

तुम हमारी क़सम तोड़ दो हम तुम्हारी क़सम तोड़ दें ।

Wednesday, February 8, 2017

February 08, 2017

खूबसूरत ग़ज़ल | डा० विष्णु सक्सेना

खूबसूरत ग़ज़ल



जब जब लगा हमें कि खुशी अब सँवर गयी 
हमसे छुड़ा के हाथ न जाने किधर गयी।

तुम मिल गए हो तब से हमे लग रहा है यूँ
बिखरी थी जितनी ज़िन्दगी उतनी निखर गयी।

गुल की हरेक पंखुरी को नोच कर कहा
तुम से बिछड़ के ज़िन्दगी इतनी बिखर गयी।

मैं देख कर उदास तुझे सोचता हूँ ये
तेरी हँसी को किसकी भला लग नज़र गयी।

घबराइये न आप हो मुश्किल घड़ी अगर
गुजरेगी ये भी जब घड़ी आसाँ गुज़र गयी।

मुझको पता नही था ये उसका मिजाज़ है
वो भोर बन सकी न तो बन दोपहर गयी।

मैं साथ उसके चल नही सकता ये जानकर
वो इक नदी थी झील के जैसी ठहर गयी||